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सोमवार, 27 फ़रवरी 2017

Ayurvedic treatments for sexual weakness and problems (यौन दुर्बलता और समस्याओं का आयुर्वेदिक उपचार)

हमारे शरीर को स्वस्थ्य और बलवान बनाये रखने के लिए सबसे महत्वपूर्ण जो काम करना चाहिए वह है पथ्य आहार विहार का पालन और अपथ्य आहार विहार का परित्याग। आपने भी इस बात पर गौर किया होगा की आहार विहार में लापरवाही और भूल चूक करते हैं तो या तो डॉक्टर घर पर आता है या हमें डॉक्टर के पास जाना पड़ता है। आज कल के अधिकांश नवयुवक यौन दौर्वल्य, यौन विकार और यौन रोगों से परेशान हैं। इस समस्या पर हमने पहले भी दो आलेख लिखा था जिसमें इन समस्याओं का होमियोपैथिक इलाज पर प्रकाश डाला था। आप इन आलेखों को यहां पढ़ सकते हैं।
०१. Homeopathic treatment of impotence

आज हम  यौन समस्यायों के आयुर्वेदिक और घरेलू उपचार के बारे में जानकारी प्राप्त करते हैं। सर्वप्रथम हमें काम ऊर्जा की महत्ता और उपयोगिता को ठीक से न सिर्फ समझना  होगा बल्कि इसकी कद्र भी करनी होगी। शरीर में अधिक  आयु तक, काम ऊर्जा बानी रहे यह स्त्री-पुरुष दोनों के लिए आवश्यक है। ऐसा तभी सम्भव है जब काम-ऊर्जा की फिजूलखर्ची न  की जाए और इसे बनाये रखने के लिए का क्षतिपूर्ति के लिए वाजीकारक योगों एवं पदार्थो का सेवन किया जाय तथा बलपुष्टिदायक आहार लिया जाय।आयुर्वेद एक बहुत ही सरल चिकित्सा उपाय है। आयुर्वेद के द्वारा यौन रोग, यौन दुर्बलता, आंशिक व नपुंसकता का सही रूप से इलाज किया जा सकता है। भागदौड़ और तनावपूर्ण जिंदगी में लोग अपने भोजन पर पूरी तरह ध्यान नहीं दे पाते, जिसके कारण कई बार बीमारियों का भी शिकार हो जाते हैं। ऐसे में लोगों की सेक्स क्षमता पर भी नकारात्मक असर पड़ता है। आज हम आपको बताने जा रहे हैं बेहद साधारण घरेलू नुस्खे और  बलपुष्टिदायक योगों के बारे में, जिनसे आप इस समस्या से बहुत जल्द छुटकारा पा सकते हैं।
घरेलू उपचार (Home remedies)

०१. कौंच के शुद्ध बीज २५० ग्राम, २५० गेहूं और २५० ग्राम छिलका रहित उड़द की दाल को दरदरा पीस लें और इसमें १०० ग्राम सफेद मूसली, ५० ग्राम गोखरू, २५ ग्राम गिलोय सत्व, १०० ग्राम ताल मखाना, केशर, जावित्री, जायफल, काली मिर्च, तेजपात, छोटी इलाइची, विदारीकंद, खरैटी  के बीज,बरियारी के बीज, सलाम मिश्री शतावर, असगन्ध, सोंठ, पीपल, बालछड़, अकरकरा, कमलगट्ठा की गिरी के २५-२५ ग्राम बारीक़ पिसा चूर्ण मिला लें। इन मिश्रण  को गाय  के शुद्ध २५० ग्राम घी में भूनते हुए आधा किलो बुरा मिलाकर लड्डू बना लें।  इसे पुरे शीत-काल में खली पेट दूध  के साथ सेवन करे। इसके प्रयोग से यौन दौर्वल्य, नपुंसकता और इन्द्रिय शिथिलता शर्तिया दूर होगी। अपनी पाचन शक्ति के अनुसार ही सेवन करें और पेट को हमेशा साफ रखें। 

०२. सफेद प्याज का रस ४ चम्मच, अदरख का रस ३ चम्मच, और लहसुन का रस ३ चम्मच मिला कर  २ चम्मच शुद्ध शहद मिला लें -इस मिश्रण को सुबह खाली पेट पी लें। इसके आधा घंटा बाद तक कुछ भी खाना पीना नही है। यह नुस्खा रोज ताजा ही तैयार करना चाहिए। कम से कम इसे २१ दिनों तक सेवन करें।  इसको लगातार 2 महीने तक सेवन करने से स्नायविक दुर्बलता, शिथिलता, लिंग का ढीलापन, कमजोरी आदि दूर हो जाते हैं।संजीवनी बूटी की तरह लाभप्रद है। 

०३. दो चम्मच छिलका रहित उड़द की दाल रत को भिंगो दें, सुबह सील पर पीसकर शहद मिला कर  चाट लें। ऊपर से गुनगुना दूध पी कर आधे घंटा तक कुछ बजी न खाये पिए। 


04. ५० छोटी पीपल को लगभग ५0 ग्राम गाय के घी में भूनकर बिल्कुल पाउडर बना लें। फिर उसमें शहद और शक्कर मिलाकर दूध निकालने के बर्तन में डालकर उसी के अंदर गाय का दूध दूह लें। इस दूध को अपनी रुचि के अनुसार सेवन करें। इसको 1-1 चम्मच की मात्रा में गाय के ताजा निकले हुए दूध के साथ सेवन करने से बल और वीर्य की वृद्धि होती है।


05. सुबह सुबह बरगद के पतो से निकला ४ बून्द ४ दूध बतासे में डाल  कर ३०  दिनों तक सेवत करें। यह दूध मुफ्त में मिलता है पर महंगे नुस्खों की बराबरी करता है।  वीर्य सम्बन्धी सभी दोषो को दूर करता है। 



06. बरगद के कच्चे फल छाया में सुखाकर पीस लें और बराबर वजन में पिसी मिश्री मिला कर १०-१० ग्राम दूध के साथ ४० दिनों तक सेवन करने से बलपुष्टि और स्रम्भणशक्ति बढ़ती है। 



07. बबूल की कच्ची पत्तियां, कच्ची फलियां और गोंद को बराबर मात्रा में मिलाकर बारीक चूर्ण बना लें और इनमें इतनी ही मात्रा में मिश्री मिलाकर किसी डिब्बे आदि में रख लें। इस चूर्ण को नियमित रूप से 2 महीने तक 2-2 चम्मच की मात्रा में दूध के साथ सेवन करने से वीर्य की वृद्धि होती है और स्तंभन शक्ति बढ़ती है। इसके अलावा यह योग शीघ्रपतन और स्वप्नदोष जैसै रोगों में बहुत लाभकारी रहता है।


08. एक गिलास  दूध  में १० ग्राम असगन्ध चूर्ण डालकर इतना उबालें की दूध एक चौथाई कम हो जाये, इसमें एक छोटा चम्मच पिसी मिश्री और आधा चम्मच शुद्ध घी  डाल कर सोते समय पियें।  इस चिकित्सा के साथ २-२ चम्मच लोहासव और द्राक्षासव और २ गोलों दिव्य रसायन की गोली का सेवन करें। 



09. घी के साथ उड़द की दाल को भूनकर और इसके अंदर दूध को मिलाकर तथा अच्छी तरह से पकाकर इसकी खीर तैयार कर लें। इसके बाद इसमें चीनी या खांड मिलाकर इसका इस्तेमाल करने से वीर्य में बढ़ोत्तरी होती है तथा संभोग करने की शक्ति भी बढ़ जाती है।

10. 100 ग्राम आंवले के चूर्ण को लेकर आंवले के रस में 7 बार भिगों लें इसके बाद इसे छाया में सूखने के लिए रख दें। इसके सूख जाने के बाद इसको इमामदस्ते से कूट-पीसकर रख लें। रोजाना इस चूर्ण को एक चम्मच लेकर शहद के साथ मिलाकर चाट लें तथा इसके ऊपर से एक गिलास गुनगुना दूध पी लें। इसके सेवन करने खोई हुई शक्ति की प्राप्ति होगी।


11. 100 ग्राम इमली के बीजों को लेकर उन बीजों को पानी में भिगोकर 4-5 दिनों के लिए रख दें तथा पाचवें दिन उन बीजों का छिलका उतारकर उनका वजन करके देखें। उनका वजन करने के बाद उनके वजन से दुगुना पुराने गुड़ को लेकर उन बीजों में मिलाकर रख दें। इसके बाद इन्हें बारीक पीसकर अच्छी तरह से घोट लें। तत्पश्चात इस मिश्रण की चने के बराबर बारीक-बारीक गोलियां बना लें। रात्रि में सहवास 1 से 2 घंटे पहले दो गोलियों को खा लें। इसका सेवन करने से सेक्स शक्ति में अजीब की शक्ति आ जाती है।

12. सेमल की जड़ : 5 मिलीलीटर से 10 मिलीलीटर के आसपास पुराने सेमल की जड़ का रस निकालकर व इसका काढ़ा बना लें तथा इसके अंदर चीनी मिला लें। इस मिश्रण को 6-7 दिनों तक पीने से वीर्य की बहुत ही अधिक बढ़ोत्तरी होती है।

13. विदारीकंद : 6 ग्राम विदारीकन्द के चूर्ण में चीनी व घी मिला लें। इस चूर्ण को खाने के बाद इसके ऊपर से दूध पीने से वृद्ध पुरुष की भी संभोग करने की क्षमता वापस लौट आती है। 


14. मूसली के लगभग 10 ग्राम चूर्ण को 250 ग्राम गाय के दूध में मिलाकर अच्छी तरह से उबालकर किसी मिट्टी के बर्तन में रख दें। इस दूध में रोजाना सुबह और शाम पिसी हुई मिश्री मिलाकर सेवन करने से लिंग का ढीलापन, शीघ्रपतन और संभोग क्रिया की इच्छा न करना, वीर्य की कमी होना आदि रोगों में बहुत लाभ मिलता है।


15. १००-१०० ग्राम शतावरी, गोखरू, तालमखाना, कौंच के बीज, अतिबला और नागबला को एकसाथ मिलाकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण में बराबर मात्रा में मिश्री मिलाकर 2-2 चम्मच की मात्रा में सुबह-शाम दूध के साथ रोजाना सेवन करने से स्तंभन शक्ति तेज होती है और शीघ्रपतन के रोग में लाभ होता है। रात को संभोग क्रिया करने से 1 घंटा पहले इस चूर्ण को गुनगुने दूध के साथ सेवन करने से संभोग क्रिया सफलतापूर्वक संपन्न होती है। वीर्य का पतला होना, यौन-दुर्बलता और शीघ्रपतन होना जैसे रोगों में इसका सेवन बहुत लाभकारी रहता है। मिर्च मसालेदार भोजन से परहेज करें। 


१४. 25 ग्राम पिसी-छनी हुई मुलहठी, 25 ग्राम पिसी और छनी असगंध, और 12 ग्राम पिसा और छना हुआ बिधारा को एकसाथ मिलाकर शीशी में भर लें। सर्दी के मौसम में इसमें से 3 ग्राम चूर्ण को अच्छी तरह से घुटे हुए लगभग 0.12 ग्राम मकरध्वज के साथ मिला लें। इसके बाद इसे मिश्री मिले दूध के साथ रोजाना सुबह और शाम 3-4 महीनों तक सेवन करने से संभोग शक्ति तेज होती है।

15. लगभग 10-10 ग्राम जायफल, काला अनार, रुमी मस्तंगी, खस की जड़, बालछड़, तालमखाना,दालचीनी, बबूल और शहद, 1 ग्राम कस्तूरी, 9 ग्राम सालममिश्री और 125 ग्राम मिश्री को एक साथ मिलाकर पीसकर छान लें। इस चूर्ण को 6 ग्राम की मात्रा में रोजाना सुबह और शाम 3-4 महीने तक सेवन करने से यौन शक्ति में बढ़ोतरी होती है। 


16. एक सेब में जितनी हो सके उतनी लौंग लगा दीजिए। इसी तरह का एक अच्छा सा बड़े आकार का नींबू ले लीजिए। इसमें जितनी ज्यादा से ज्यादा हो सके, लौंग लगाकर दोनों फलों को एक सप्ताह तक किसी बर्तन में ढककर रख दीजिए। एक सप्ताह बाद दोनों फलों में से लौंग निकालकर अलग-अलग बोतल में भरकर रख लें। पहले दिन नींबू वाले दो लौंग को बारीक कूटकर बकरी के दूध के साथ सेवन करें। इस तरह से बदल-बदलकर 40दिनों तक 2-2 लौंग खाएं। यह एक तरह से सेक्स क्षमता को बढ़ाने वाला एक बहुत ही सरल उपाय है।

17. शतावरी के चूर्ण 20 ग्राम को 150 मिलीलीटर गाय के दूध के साथ मिलाकर 600 मिलीलीटर पानी के अंदर उबाल लें। उसके बाद केवल दूध बाकी रह जाने पर इसे आंच से नीचे उतारकर इसके अंदर चीनी या खांड मिलाकर इस दूध को पीने से खोई हुए शक्ति पुनः प्राप्त हो जाती है। 

18. 500 ग्राम विधारा और 500 ग्राम नागौरी असगंध- इन दोनों को ले लें। फिर इसे अच्छी तरह से कूट-पीसकर तथा इसे छानकर रख लें। सुबह के समय रोजाना इस चूर्ण को 2 चम्मच खा लें। उसके बाद ऊपर से मिश्री मिला हुआ गर्म-गर्म दूध को पी लें। यह बहुत ही कारगर मिश्रण है। 


१९. 6 ग्राम गोखरू का चूर्ण और काले तिल 10 ग्राम को बराबर मात्रा में लेकर इसे 250 मिलीलीटर बकरी के दूध में उबालकर तथा उसे ठंडा करके शहद को मिलाकर खाना चाहिए। इसका सेवन करने से हस्तमैथुन से यौन क्रिया में आई कमजोरी भी समाप्त हो जाती है।

२०. गोंद के लड्डू तथा तिल के लड्डू को खाने से संभोग करने में आई कमजोरी दूर हो जाती है। · रात के समय में 4-5 पीस बादाम को भिगोकर, 2 से 4 पीस अंजीर, नारियल की गिरी, छुहारे, तालमखाना. चिलगोजे, पिस्ता तथा 8-10 पीस मुनक्का, इसमें से किसी भी एक चीज का प्रयोग अपनी शक्ति के अनुसार करने से सेक्स क्षमता में आई कमजोरी दूर हो जाती है।



हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। आपका चिकित्सक आपकी सेहत के बारे में बेहतर जानता है और उसकी सलाह का कोई विकल्प नहीं है।परिक्षित चिकित्सक से  चिकित्सा कराने से अवश्य ही कामयाबी मिलती है। 

धन्यवाद ,

शनिवार, 11 जून 2016

उचित आहार विहार का महत्व

चिकित्सक हमें स्वास्थ्य लाभ देता है और वकील हमें न्याय दिलाने में सहायक होता है लेकिन हमें इन दोनों की आवश्यकता तभी पड़ती है जब हम उचित आहार विहार और आचार विचार का पालन नहीं करते। यदि हम उचित आहार विहार का नियमित पालन करें तो बीमार ही क्यों पड़ें? अगर बीमार न पड़ें तो  दवाखाने जाने या डॉक्टर बुलाने की .नौबत ही क्यों हो। उचित आहार विहार न करने, नियमित रूप से उचित दिनचर्या का पालन न करने, आलसी बने रहने, पर्याप्त नींद सोने, देर रात तक जागने, और सुबह देर तक सोये रहने, पाचन शक्ति ठीक न रहने तथा कब्ज रहने से शरीर निर्बल और दुबला पतला हो जाता है और कमजोरी बढ़ती जाती है। 
आचार विचार ठीक रखें तो ना तो हमें कोर्ट-कचहरी के चक्कर लगाने पड़ेंगे और ना तो किसी वकील की सेवाएं लेने की जरूरत पड़े। अब एक सोचने वाली विशेष बात यह है की यदि वकील पैरवी करने में भूल-चूक कर जाये तो मुलजिम छ: फुट हवा में लटक सकता है और चिकित्सा में कोई घातक भूल हो जाये तो रोगी छ: फुट जमीन के अंदर जा सकता है।
      एक कहावत है -गुजर गई गुजरान, क्या झोपडी और क्या मैदान? अतः जो बीत चुका सो बीत चुका, उसे अब बदलने से रहे, हाँ जो आने वाला समय है उसे सजाया संवारा जा सकता है इसलिये "बीती ताहि बिसार दे, आगे की सुध लेय के अनुसार हमें पिछले समय में की गयी भूलों, गलतियों और हरकतों से सबक लेकर आगे के जीवन को सुधारना चाहिये।  
जिस तरह से हंस रहा हूँ पी-पी के अश्के  गर्म, 
यूँ  दूसरा  हंसे  तो  .....  कलेजा  निकल  पड़े।